शीशा, अलमारी, लोहा - WiFi के कितने दुश्मन, जानिए इसका इतिहास
पता नहीं क्यों WiFi रह-रहकर स्लो चलने लगता है? जगह बदलकर देखिए, शायद काम बन जाए। ऐसा क्यों होता है, जानिए uplive24.com पर। साथ ही WiFi के सेहत पर असर और इतिहास के बारे में भी जानकारी।
Why WiFi Is Slow at Home : आज शायद ही कोई घर होगा जहां Wi-Fi Router न हो। मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी से लेकर सीसीटीवी कैमरा तक, सब कुछ इंटरनेट से जुड़ा है। इसके बावजूद सबसे आम शिकायत यही सुनने को मिलती है कि इंटरनेट स्लो है, वीडियो बार-बार रुक रहा है, वेबपेज खुलने में देर लग रही है या फिर नेटवर्क बार-बार डिस्कनेक्ट हो रहा है।
अक्सर लोग इसका दोष इंटरनेट कंपनी पर डाल देते हैं, लेकिन कई बार असली वजह हमारे ही घर के अंदर छुपी होती है, राउटर की गलत जगह। (Why WiFi Is Slow at Home)
Wi-Fi असल में रेडियो वेव्स पर काम करता है और यही वेव्स घर में रखी चीजों से टकराकर कमजोर पड़ जाती हैं। अगर राउटर के आसपास कुछ खास तरह की चीजें रखी हों, तो तेज इंटरनेट भी कछुए की चाल चलने लगता है।
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कांच और धातु क्यों बनते हैं WiFi के दुश्मन (Why WiFi Is Slow at Home)?
अगर आपके राउटर के पास बड़ा शीशा, मिरर या कांच की अलमारी है, तो सिग्नल सीधा नहीं फैल पाता। कांच रेडियो वेव्स को रिफ्लेक्ट कर देता है, जिससे कवरेज गड़बड़ा जाती है। वहीं लोहे या स्टील की चीजें सिग्नल को रोक देती हैं। यही वजह है कि मेटल रैक या लोहे की अलमारी के पास रखा राउटर अक्सर कमजोर नेटवर्क देता है। (Why WiFi Is Slow at Home)
Bluetooth डिवाइस भी करते हैं स्पीड खराब
बहुत कम लोग जानते हैं कि Bluetooth और Wi-Fi एक ही 2.4 GHz फ्रीक्वेंसी पर काम करते हैं। अगर राउटर के पास ब्लूटूथ स्पीकर, वायरलेस माउस या कीबोर्ड रखा हो, तो सिग्नल आपस में टकराने लगते हैं। नतीजा यह होता है कि इंटरनेट स्लो हो जाता है या बार-बार ड्रॉप होने लगता है।
अलमारी या फर्नीचर में बंद राउटर सबसे बड़ी गलती
अक्सर लोग राउटर को छिपाने के लिए लकड़ी की अलमारी या फर्नीचर के अंदर रख देते हैं। देखने में यह ठीक लगता है, लेकिन सिग्नल के लिए यह सबसे खराब स्थिति होती है। बंद जगह में रखे राउटर से सिग्नल बाहर निकल ही नहीं पाता (Why WiFi Is Slow at Home)। राउटर हमेशा खुली और थोड़ी ऊंची जगह पर होना चाहिए, ताकि सिग्नल चारों तरफ बराबर फैल सके।
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किचन और माइक्रोवेव से क्यों रखें दूरी
किचन में रखा माइक्रोवेव भी Wi-Fi का बड़ा दुश्मन है। माइक्रोवेव भी 2.4 GHz फ्रीक्वेंसी पर काम करता है और उससे निकलने वाली रेडिएशन Wi-Fi सिग्नल को बिगाड़ देती है (Why WiFi Is Slow at Home)। अगर राउटर किचन के पास है, तो इंटरनेट की क्वालिटी पर असर पड़ना तय है। बेहतर यही है कि राउटर घर के बीच वाले हिस्से में रखा जाए।
अब जानिए कि WiFi का पहला इस्तेमाल कहां हुआ था?
Wi-Fi तकनीक का आधार IEEE 802.11 स्टैंडर्ड है, जिसे 1990 के दशक में विकसित किया गया। आम लोगों के लिए इसका पहला व्यावसायिक इस्तेमाल 1999 के आसपास शुरू हुआ, जब अमेरिका में पहली बार पब्लिक जगहों पर वायरलेस इंटरनेट उपलब्ध कराया गया। धीरे-धीरे यह तकनीक घरों, दफ्तरों और फिर पूरी दुनिया में फैल गई (WiFi History)।
Wi-Fi का पहला व्यावहारिक इस्तेमाल 1993 में अमेरिका के पिट्सबर्ग स्थित कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी में हुआ था। यहां वायरलेस एंड्र्यू नामक पहला कैंपस-वाइड वायरलेस इंटरनेट नेटवर्क बनाया गया था। इससे पहले, 1997 में IEEE 802.11 स्टैंडर्ड विकसित हुआ, जो Wi-Fi का आधार बना।
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क्या WiFi से सेहत को नुकसान होता है?
Wi-Fi सेहत को लेकर अक्सर डर फैलाया जाता है, लेकिन अब तक की बड़ी वैज्ञानिक रिसर्च और वैश्विक स्वास्थ्य संस्थाओं का कहना है कि Wi-Fi से निकलने वाली रेडियो वेव्स बहुत कम ऊर्जा वाली होती हैं। यह न तो डीएनए को नुकसान पहुंचाती हैं और न ही कैंसर जैसी बीमारियों से सीधा जुड़ाव साबित हुआ है। सामान्य घरेलू इस्तेमाल में Wi-Fi को सुरक्षित माना जाता है।
ज्यादातर वैज्ञानिक संगठन, जैसे हेल्थ कनाडा और ARPANSA, कहते हैं कि रेगुलेटरी लिमिट्स के अंदर Wi-Fi रेडिएशन से कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता। ये रेडियोफ्रीक्वेंसी EMF (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड्स) नॉन-आयनाइजिंग होते हैं, जो DNA को नुकसान नहीं पहुंचाते। एक सिस्टेमेटिक रिव्यू (2021) में पाया गया कि Wi-Fi एक्सपोजर से कोई डेट्रिमेंटल हेल्थ इफेक्ट्स नहीं होते।
हालांकि, कुछ स्टडीज चिंता जताती हैं। उदाहरण के लिए, 2018 की एक रिव्यू में Wi-Fi से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, स्पर्म डैमेज, न्यूरोसाइकियाट्रिक इफेक्ट्स (जैसे EEG चेंजेस) और सेलुलर डैमेज का जिक्र है। 2023 की एक स्टडी में ह्यूमन सेल्स पर वायरलेस रेडिएशन से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ने की बात कही गई। लेकिन ये अध्ययन सीमित हैं। कुल मिलाकर, वर्तमान एविडेंस से Wi-Fi को सेफ माना जाता है, लेकिन प्रेग्नेंट महिलाओं या बच्चों के लिए एक्सपोजर कम रखने की सलाह दी जाती है।
दुनिया का सबसे ताकतवर WiFi कहां लगा है?
दुनिया में सबसे ताकतवर Wi-Fi आम घरों में नहीं, बल्कि रिसर्च और डिफेंस प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होता है। वैज्ञानिकों ने कई बार लंबी दूरी तक Wi-Fi सिग्नल भेजने के सफल प्रयोग किए हैं, जहां सैकड़ों किलोमीटर तक वायरलेस नेटवर्क कनेक्शन स्थापित किया गया। ये सिस्टम आम राउटर से कहीं ज्यादा पावरफुल होते हैं और विशेष उद्देश्यों के लिए लगाए जाते हैं।
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दुनिया का सबसे ताकतवर या एडवांस्ड Wi-Fi नेटवर्क सिंगापुर का Wireless@SG माना जाता है। यह एक नेशनवाइड पब्लिक Wi-Fi नेटवर्क है, जो पूरे देश में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी प्रदान करता है। इसके अलावा, साउथ कोरिया का गीगाबिट कनेक्टिविटी और जापान का हाई-स्पीड Wi-Fi भी टॉप में हैं।

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